Dasbodh dashak - 20
प्राणीव्यापक मन व्यापक| पृथ्वी व्यापक तेज व्यापक | वायो आकाश त्रिगुण व्यापक| अंतरात्मा मूळमाया || १||
निर्गुण ब्रह्म तें व्यापक| ऐसें अवघेंच व्यापक | तरी हें सगट किं काये येक| भेद आहे || २||...
Dasbodh dashak - 19
ब्राह्मणें बाळबोध अक्षर| घडसुनी करावें सुंदर | जें देखतांचि चतुर| समाधान पावती || १||
वाटोळें सरळें मोकळें| वोतलें मसीचें काळें | कुळकुळीत वळी चालिल्या ढाळें| मुक्तमाळा जैशा ||२||...
Dasbodh dashak - 18
तुज नमूं गजवदना| तुझा महिमा कळेना | विद्या बुद्धि देसी जना| लाहानथोरांसी || १||
तुज नमूं सरस्वती| च्यारी वाचा तुझेन स्फूर्ती | तुझें निजरूप जाणती| ऐसे थोडे || २||...
Dasbodh dashak - 17
निश्चळ ब्रह्मी चंचळ आत्मा| सकळां पर जो परमात्मा | चैतन्य साक्षी ज्ञानात्मा| शड्गुणैश्वरु || १||
सकळ जगाचा ईश्वरु| म्हणौन नामें जगदेश्वरु | तयापासून विस्तारु| विस्तारला ||२||...
Dasbodh dashak - 16
धन्य धन्य तो वाल्मीक| ऋषीमाजी पुण्यश्लोक | जयाचेन हा त्रिलोक्य| पावनजाला ||१||
भविष्य आणी शतकोटी| हें तों नाहीं देखिलें दृष्टीं | धांडोळितां सकळ सृष्टि| श्रुत नव्हे ||२||...