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सोनमछली by डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

[Nov 05, 2007]

पिछले कुछ वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी विस्तार हुआ है उसकी वजह से भारत की युवा पीढ़ी के लिए अमरीका और भी नज़दीक का तथा सम्भावनापूर्ण देश बन गया है| भारत से कम्प्यूटर में कोई डिप्लोमा या डिग्री, या अन्य कोई दक्षता प्राप्त की जाए और फिर अमरीका आकर उसे बढ़ाया जाए तथा यहीं नौकरी कर ली जाए| अपने देश के संसाधनों से पढ़ लिखकर, अमरीका आकर, यहां नौकरी कर 'अपने देश की सेवा' करने का स्वप्न देखने वालों की तादाद दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जा रही है| यह कहना अनुचित होगा कि इस स्वप्न के मूल में केवल डॉलर की चमक और खनक है| तकनीक के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए लगभग इतना ही या इससे भी बड़ा आकर्षण अद्यतन के सजीव सम्पर्क का भी है| यह कहना इसलिए भी ज़रूरी है कि अच्छा वेतन अब भारत में भी मिलने लगा है| दृश्य माध्यमों के विस्तार ने अमरीका की चमक-दमक भरी ज़िन्दगी की जो अगणित छवियां घर-घर पहुंचाई हैं वे भी युवा पीढ़ी के लिए अमरीका को आकर्षण का केंद्र बनाती हैं| और इस कारण वे लोग भी, जिनके पास इस तरह की तकनीकी योग्यता नहीं है, मेहनत मज़दूरी के बल पर भी अमरीका में रह कर अपना जीवन संवारने का सपना पालने लगे हैं|

पिछले कुछ वर्षों में भारत से अमरीका आने वालों की संख्या में काफी इज़ाफा हुआ है| इनमें पढ़ने आने वाले और काम करने आने वाले दोनों ही शरीक हैं| वृद्धि तो पर्यटकों की संख्या में भी कम नहीं हुई है, लेकिन उनकी चर्चा यहां प्रासंगिक नहीं है|

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At just four years old Mozart was able to learn a piece of music in half an hour.

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