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आज के झूलाघर, कल के वृद्धाश्रम by डॉ. महेश परिमल

(Contd. from page 2...)

अरे भाई अधिक दूर जाने की आवश्यकता ही नहीं है, शादी-समारोह में किसी बुजुर्ग को रीति-रिवाजोें के बारे में विस्तार से बताते हुए भी तो अक्सर देखा गया है।

बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं, यदि समाज या घर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में कुछ गलत हो रहा है, तो इसे बताने के लिए इन बुजुर्गों के अलावा कोन है, जो हमें सही बताएगा? शादी के ऐन मौके पर जब वर या वधू पक्ष के गोत्र बताने की बात आती है, तो घर के सबसे बुजुर्ग की ही खोज होती है। आज की युवा पीढ़ी भले ही इसे अनदेखा करती हो, पर यह भी एक सच है, जो बुजुर्गों के माध्यम से सही साबित होता है। घर में यदि कंप्यूटर है, तो अपने पोते के साथ गेम खेलते हुए कई बुजुर्ग भी मिल जाएँगे, या फिर आज के फैशन पर युवा बेटी से बात करती हुई कई बुजुर्ग महिलाएँ भी मिल जाएँगी। यदि आज के बुजुर्ग यह सब कर रहे हैं, तो फिर उन पर यह आरोप तो बिलकुल ही बेबुनियाद है कि वे आज की पीढ़ी के साथ कदमताल नहीं करते।

बुजुर्ग हमारे साथ बोलना, बतियाना चाहते हैं, वे अपनी कहना चाहते हैं और दूसरों की सुनना भी चाहते हैं। पर हमारे पास उनकी सुनने का समय नहीं है, इसीलिए हम उनकी सुनने के बजाए अपनी सुनाना चाहते हैं। याद करो, अपनेपन से भरा कोई पल आपने अपने घर के बुजुर्ग को कब दिया है? शायद आपको याद ही नहीं होगा। क्योंकि अरसा बीत गया, इस बात को।

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The famous Casanova (Giacomo Casanova) was a librarian for many years before he died.

Heh Heh Heh...
"Mummy," says Sarah, "do you know that road they’ve built over Golders Green?"
"Yes," replies her mum.
"Well," says Sarah, "do you know what name my friends have given it?"
"No, what are they calling it?" asks her mum.
"The Passover," replies Sarah.

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